जंगल की राजकुमारी - कल्याणी, रानी और नटखट की अनोखी दोस्ती
बहुत समय पहले की बात है। एक घना और हरा-भरा जंगल था जिसका नाम था "सप्तवन"। इसी जंगल के बीचों-बीच एक छोटी-सी झोपड़ी में जन्मी थी एक प्यारी-सी बच्ची, जिसका नाम रखा गया — कल्याणी।
कल्याणी का कोई परिवार नहीं था, उसे इस जंगल ने ही पाला था। पेड़ उसके छत थे, नदियाँ उसकी सहेलियाँ, और जानवर उसके परिवार बन गए थे।
एक दिन जब कल्याणी मुश्किल से पाँच साल की थी, वह जंगल के भीतर गहरे भाग गई। तभी अचानक उसकी मुलाकात हुई एक भव्य और विशाल हाथी से, जिसका नाम था रानी।
रानी एक बेहद बुद्धिमान और दयालु हाथी थी। उसने देखा कि नन्ही कल्याणी अकेली और डरी हुई है। वह धीरे-धीरे उसके पास आई और अपनी लंबी सूंड से कल्याणी को सहलाया।
कल्याणी मुस्कुराई, और उसी पल दोनों के बीच एक अनकही दोस्ती का जन्म हुआ।
कुछ ही समय बाद, इस जोड़ी में शामिल हुआ एक और नन्हा मित्र — एक शरारती चूहा जिसका नाम था नटखट।
नटखट हर समय नई-नई शरारतें करता, मगर उसका दिल सोने का था।
वह कभी-कभी कल्याणी के बालों में खेलता, कभी रानी के कान के पीछे छुप जाता।
तीनों की दोस्ती जंगल में धीरे-धीरे मशहूर हो गई।
जहाँ रानी अपनी ताकत और समझदारी से कल्याणी की रक्षा करती, वहीं नटखट अपनी चतुराई और चपलता से हर मुश्किल को हल कर देता।
एक दिन जंगल में मुसीबत आ गई। जंगल के बाहर से कुछ शिकारी आ धमके थे।
उन्होंने जाल बिछाए और जानवरों को पकड़ने लगे।
जब यह खबर कल्याणी, रानी, और नटखट को मिली, तो उन्होंने एक योजना बनाई।
रानी ने अपनी भारी सूंड से पेड़ों को तोड़कर रास्ता बंद कर दिया ताकि शिकारी आगे न बढ़ सकें।
नटखट ने अपने छोटे से आकार का फायदा उठाते हुए शिकारी के कैंप में घुसकर उनकी रस्सियाँ काट दीं और उनके खाने-पीने का सामान बिखेर दिया।
कल्याणी ने जंगल के जानवरों को इकट्ठा किया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया।
कुछ ही घंटों में शिकारी हार मानकर जंगल छोड़कर भाग गए।
पूरा जंगल खुशी से गूँज उठा।
सभी जानवरों ने कल्याणी, रानी, और नटखट को अपना नायक मान लिया।
उस दिन से, सप्तवन जंगल में एक कहावत चल पड़ी:
"जहाँ दोस्ती में प्रेम हो, वहाँ कोई शिकारी टिक नहीं सकता।"
कल्याणी बड़ी होती गई, लेकिन उसने कभी जंगल को नहीं छोड़ा।
रानी उसकी सबसे भरोसेमंद सहेली रही, और नटखट हमेशा उसकी हँसी की वजह बना।
तीनों की दोस्ती समय के साथ और भी मजबूत होती चली गई।
आज भी कहते हैं, अगर कोई सप्तवन के बीचों-बीच चुपचाप खड़ा हो, तो हवा में बच्चों की हँसी, हाथी के सूंड से बजती मधुर ध्वनि और एक नन्हे चूहे की किलकारियाँ सुनाई देती हैं...
क्योंकि दोस्ती कभी खत्म नहीं होती, वह बस समय के साथ अमर हो जाती है।

