छोटा बीज, बड़ा पेड़
गाँव के एक किसान, रघु, के पास बड़ी उपजाऊ ज़मीन थी। एक दिन वह अपने खेत में बीज बो रहा था। उसके पास अनाज के बड़े-बड़े बीज थे, लेकिन उसकी थैली के कोने में एक छोटा और साधारण-सा बीज पड़ा था। रघु ने उसे देखकर सोचा, "इस छोटे बीज से क्या होगा? यह तो इतना मामूली है कि इससे कोई फसल भी नहीं उगेगी।"
फिर भी, उसने उसे एक कोने की सूखी और बंजर ज़मीन में डाल दिया। उसने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, क्योंकि उसे यकीन था कि इससे कुछ खास नहीं निकलेगा।
बारिश का मौसम आया। बड़े बीजों से फसल उगने लगी, और किसान अपनी फसल को देखकर खुश था। लेकिन वह छोटा बीज, जो बंजर ज़मीन में पड़ा था,
धीरे-धीरे मिट्टी के अंदर अपनी जड़ें जमाने लगा। उसे न तो अच्छे पानी की सुविधा मिली, न ही खाद, फिर भी उसने हार नहीं मानी।कुछ समय बाद, किसान की नजर उस कोने में गई। उसने देखा कि जहाँ उसने वह छोटा बीज डाला था, वहाँ एक छोटा-सा पौधा उग आया था। रघु ने सोचा, "यह पौधा ज्यादा दिन नहीं टिकेगा।"
लेकिन वह पौधा हर मौसम का डटकर सामना करता रहा। गर्मी आई, बारिश आई, सर्दी आई, पर वह हर दिन और मजबूत होता गया। सालों बाद वह पौधा एक विशाल पेड़ बन गया। उसकी शाखाएँ इतनी घनी थीं कि राहगीर उसकी छाया में सुस्ताने लगे। उसके फल इतने मीठे थे कि गाँव के बच्चे उनसे खुश हो जाते थे। पक्षियों ने उसमें घोंसले बना लिए, और पेड़ हर किसी के लिए उपयोगी बन गया।
किसान अब रोज उस पेड़ को देखता और सोचता,
"जिसे मैंने मामूली समझा था, वही आज सबसे बड़ा आशीर्वाद बन गया है।"सीख:
कभी भी किसी चीज़ को छोटा मत समझो, चाहे वह कितना भी मामूली क्यों न लगे। मेहनत, धैर्य, और समय के साथ, सबसे छोटा बीज भी एक विशाल पेड़ बन सकता है।


