एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक बुढ़िया रहती थी। उसका नाम गौरी था। गौरी बहुत ही सरल और ईमानदार महिला थी। वह हमेशा दूसरों की मदद करने को तैयार रहती थी।
एक दिन, गाँव में एक नया व्यक्ति आया। उसका नाम राजू था। लोग कहने लगे कि राजू धोखेबाज है, लेकिन गौरी ने उस पर ध्यान नहीं दिया और उसको अपने घर में ठहराया।
कुछ दिनों बाद, गाँव में एक बड़ा चोरी का मामला हुआ। सभी लोग चौंक गए कि चोर कौन हो सकता है। लोग शक करने लगे कि शायद राजू ही चोर है।
गौरी ने यह सुना और उसको विश्वास नहीं किया। वह राजू से सीधे पूछने गई और उसको पूछा, "क्या तुमने चोरी की?"
राजू ने अपने सर उचाल कर कहा, "नहीं, मैंने कभी ऐसा काम नहीं किया।"
गौरी ने उसके आंसूओं को देखा और समझ गई कि वह सच कह रहा है।
गौरी ने सभी को बताया कि राजू ने चोरी नहीं की है और उसके खिलाफ गलत धारणा नहीं करनी चाहिए।
बाद में पता चला कि चोर गाँव से बाहर का था और राजू बेगुनाह था। लोग गौरी की सहायता के लिए उसकी सराहना करने लगे।
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें दूसरों पर बिना सबूत के शक नहीं करना चाहिए। इमानदारी और सहानुभूति के साथ दूसरों के साथ व्यवहार करना चाहिए।
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